टैक्स चोरी के मामलों में भी घिरी है कंपनी
यह पहली बार नहीं है जब हिन्द एनर्जी विवादों में आई है। स्थानीय स्तर पर नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली इस कंपनी पर पूर्व में GST विभाग द्वारा टैक्स चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के चलते बड़ी कार्रवाई भी की जा चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि कंपनी प्रबंधन न तो सरकारी नियमों का सम्मान करता है और न ही सामाजिक उत्तरदायित्वों का।
क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों नें दी चेतावनी
बिलासपुर-जिला मुख्यालय से महज 10 किमी कि दुरी पर स्थित एवं मस्तूरी तहसील के ग्राम गतौरा में संचालित Hind Energy And Coal Benefication Ltd (हिन्द ग्रुप) कोल वाशरीज के क्षमता विस्तार को लेकर पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। स्थानीय ग्रामीणों, छात्र संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने कंपनी प्रबंधन पर जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग की मिलीभगत से ‘गुपचुप तरीके’ से जनसुनवाई कराने की फिराक में होने का एक सनसनीखेज आरोप लगाया है।चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित जनसुनवाई की कोई भी आधिकारिक सूचना न तो छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है और न ही बिलासपुर जिला प्रशासन के जिला जनसम्पर्क के माध्यम से कोई जानकारी है सरकारी वेबसाइट्स से सूचना गायब, पारदर्शिता पर गंभीर सवाल
पर्यावरण नियमों के अनुसार, किसी भी प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग की स्थापना या उसके क्षमता विस्तार से पहले प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों के सुझाव, आपत्तियां और विचार लेने के लिए जनसुनवाई आयोजित करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। नियमों के तहत, जनसुनवाई की तिथि से कम से कम 30 दिन पहले जिला प्रशासन और पर्यावरण मंडल की वेबसाइट पर विस्तृत नोटिस अपलोड करना और क्षेत्र के दो प्रतिष्ठित स्थानीय समाचार पत्रों में इसका विज्ञापन देना अनिवार्य है, ताकि प्रभावित जनता अपनी आपत्तियां दर्ज करा सके।परंतु, वर्तमान में जारी 24 जून 2026 के शेड्यूल को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि इस जनसुनवाई का कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड या नोटिस सरकारी वेबसाइटों पर सार्वजनिक नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित जनता को विरोध करने और अपनी आपत्तियां दर्ज कराने से रोकने के लिए जानबूझकर इस सूचना को छुपाया जा रहा है और अंदरखाने कागजी औपचारिकताएं पूरी करने की साजिश रची जा रही है।
वाशरी के वर्तमान संचालन से ही आस-पास के आधा दर्जन से अधिक गाँव पूरी तरह से नरक बन चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार:गतौरा, फरहदा, खैरा और कर्रा इन गाँवों में चौबीसों घंटे कोयले की बारीक राख उड़ रही है, जिससे सांस की बीमारियां आम बात सी हो गई हैं।फरहदा और लगरा: कृषि भूमि पर कोयले की परत जमने से फसलें बर्बाद हो रही हैं और उपजाऊ जमीन बंजर में तब्दील हो रही है।खैरा: इस क्षेत्र में भारी वाहनों की बेतरतीब आवाजाही और अनियोजित कचरे की डंपिंग से स्थानीय सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
