मस्तूरी//बिलासपुर जिले के मस्तूरी में सहकारिता विभाग में फिर एक बड़े घोटाले की जानकारी सामने आ रही है
यह मामला भी धान खरीदी से जुड़ा है और यह कही और नहीं बल्कि मस्तूरी के ही बहतरा में उजागर हुआ है और ताज्जुब की बात तो ये है की यह सब कुछ राज्य सरकार के द्वारा धान खरीदी बंद किए जाने के बाद हुआ है आपको भी यह बात हजम नहीं हो रही होंगी पर ये सच है दरअसल बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकास खण्ड के पचपेड़ी तहसील में आने वाले बहतरा धान खरीदी केंद्र में ऐसा खेल खेला गया जिसको सुन कर हर कोई हैरान हो जाएगा राज्य सरकार नें तय किया था की किसानों से 31 जनवरी तक समर्थन मूल्य में धान खरीदी किया जाएगा पर कुछ किसानों की धान तय समय में नहीं बिक सका जिसके बाद डेट कों बढ़ाया गया और 6 फरवरी तक किसानों का धान ख़रीदा गया और बहतरा में धान खरीदी की क्लोज़िंग रिपोर्ट में भी यही दिखा रहा है और यहाँ के ऑपरेटर नें भी यही रिपोर्ट सहकारिता विभाग के अधिकारीयों कों भेजा है जिसमे खरीदी गई धान की मात्रा 40135.60 दिखा रहा है। इसके बाद शुरू हुआ असली खेल और इसके बाद राज्य सरकार नें एनआईसी पोर्टल कों 6 फरवरी के बाद बंद कर दिया क्यों की धान खरीदी बंद हो चुकी थी, फिर 15 फरवरी कों बहतरा धान खरीदी केंद्र में अचानक खरीदी गई धान की मात्रा में लगभग 319 क्विंटल 798 बोरी धान टोटल खरीदी 40454.80 दिखाने लगा बताते चलें की यहाँ अब बहतरा धान खरीदी में टोटल खरीदी गई धान की मात्रा में 319.2 क्विंटल ज्यादा दिखाने लगा वो भी ये धान तब खरीदी गई जब धान खरीदी बंद हो चुकी थी। जानने योग्य बात ये है की नोडल अधिकारी नवीन मेश्राम नें ज़ब धान खरीदी केंद्र बहतरा का भौतिक सत्यापन दिनांक 08,02,26, किया तब भी धान की मात्रा 40135.60 क्विंटल था फिर अचानक कैसे लगभग 319 क्विंटल धान कहाँ से ख़रीदा गया वो भी तब ज़ब खरीदी बंद हो चूका था आखिर ये घपला कैसे हुआ और इसपे किसी अधिकारी का ध्यान कैसे नहीं गया जो जाँच का विषय जरूर है क्या यह एक मिस्टेक है या कोई बड़ा घोटाला यह तो जाँच के बाद ही पता चल पाएगा।
वही इस पुरे मामले में बहतरा के प्रबंधक उमाशंकर पटेल नें कहा की उनको इस बारे में मार्च में ही पता चला ज़ब टोटल खरीदी गई धान की रिपोर्ट निकाला गया मुझे तो कंप्यूटर चलाना नहीं आता इसके बारे में ऑपरेटर ही बता पायेगा।
वही ऑपरेटर नरेंद्र पटेल का कहना है की उनसे रिपोर्ट बनाने में गलती हुई है हालांकि हमने उनको सही रिपोर्ट देनें की बात कही तो वो नहीं दे पाए अब तो जाँच के बाद ही सत्य सामने आएगा क्या ये सिर्फ एक गलती है या एरमसही जैसा घोटाला जो सिर्फ अपनी जेब भरने के लिए किया गया था।
31 जनवरी तक खरीदी गई धान की मात्रा 40135.60
7 मार्च 2026 ज़ब खरीदी बंद हो चुकी थी तक खरीदी गई धान की मात्रा 40454.80
वही इस पुरे मामले में मस्तूरी सहकारिता विभाग की ब्लॉक सहकारिता विस्तार अधिकारी गोधूलि वर्मा बताती है कि जाँच कराया जा रहा है जाँच के बाद ही पता चलेगा की आंकड़ों में गड़बड़ी की वजह से ऐसा हुआ या ये जान बुच कर किया गया है।
इस पुरे मामले में बहतरा धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक उमाशंकर पटेल का कहना है की उनको इसकी जानकारी ही नहीं थी लास्ट टाइम जब उसने मार्च में रिपोर्ट देखा तो उनकी भी आंखे चमक उठी तब उन्होंने ऑपरेटर कों पूछा तो उसने सब कुछ बना लेने की बात कही।
[3/25, 1:45 PM] Suraj Thakur Press: CG – बहतरा में भ्रष्टाचार का अनोखा खेल जाँच की अधिकारी कह रहें बात कब उठेगा पर्दा पोर्टल बंद होनें के बाद कैसे चढ़ा धान किसके संरक्षण में हुआ ये संभव जानें पढ़े पूरी ख़बर
[3/25, 1:47 PM] Suraj Thakur Press: गैर कानूनी ढंग से हो रही अमलडीहा उदईबंद रेत घाट में खनन ग्रामीण पस्त अधिकारी मस्त आक्रोश में पब्लिक जानें इससे जुड़ी सभी नियम
[3/25, 1:47 PM] Suraj Thakur Press: मस्तूरी//बिलासपुर जिले का मस्तूरी विधानसभा में रेत का अवैध परिवहन लगातार जारी है जिसके कारण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने जोंधरा से गोपालपुर परसोड़ी कुकुर्दीकला अमलडीहा पहुंच मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है जिसको लेकर ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधियों ने कुछ दिनों पहले ही उच्च अधिकारियों से शिकायत भी किया है पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है जिसकी वजह से अब ग्रामीण भारी आक्रोषित हो गए हैं।
कुकुर्दीकला सरपंच पति कृपाल सिंह पैकरा बताते हैं कि अमलडीहा उदईबंद रेत घाट से नियम विरुद्ध सप्लाई लगातार जारी है रेत घाट का ठेकेदार लगातार पर्यावरण नियमों को दरकिनार कर रात भर अवैध तरीके से रेत का परिवहन करवा रहा है और अधिकारियों से शिकायत करने पर भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
वही जनपद सदस्य जमुना पैकरा नें बताया की हमने अपने लेटर हेड में कई बार इनके द्वारा कराए जा रहे नियम विरुद्ध रेत खनन की शिकायत की है पर ना ही उच्च अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्रवाई की है और ना ही खनिज विभाग इसको लेकर गंभीर है जिसके कारण गुस्साए ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले गोठान के सामने वाली कच्ची रोड को खो दिया था जिसके कारण एक दिन इनका रात में चलने वाला नियम विरुद्ध खनन और सप्लाई रुक गई थी पर दूसरे दिन उन्होंने उस गड्ढे को फिल कर दिया और फिर से रात वाली नियम विरुद्ध रेत की सप्लाई शुरू कर दी।
क्या है रेत खनन का का नियम..
रात में रेत घाट को संचालित करना गैरकानूनी है और इसे आम तौर पर बंद रखा जाता है। इसके पीछे पर्यावरणीय, कानूनी सुरक्षात्मक कारण मुख्य हैं: पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन: राष्ट्रीय हरित अधिकरण और ‘सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश 2016’ के अनुसार, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए रात में रेत निकालना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। नदी के इकोसिस्टम को नुकसान: रात के समय की गई माइनिंग से नदी के किनारे को गहरा नुकसान पहुँचता है, कटाव बढ़ता है और जलीय जीवों के आवास नष्ट होते हैं। अवैध खनन पर रोक: रात में अवैध रेत माफिया सक्रिय हो जाते हैं, जो अनुमति प्राप्त मात्रा से अधिक और प्रतिबंधित क्षेत्रों से रेत निकालते हैं। रात में काम होने से सरकारी निगरानी मुश्किल हो जाती है। पोकलेन मशीनों पर प्रतिबंध: नदी के अंदर मशीनों (पोकलेन/जेसीबी) का उपयोग करके सीधे नदी के तल से रेत निकालना प्रतिबंधित है, जिसे अक्सर रात में चुपके से किया जाता है। सुरक्षा और डकैती का डर: रात के अंधेरे में रेत घाटों पर आपराधिक गतिविधियों और हिंसक हमलों का जोखिम अधिक होता है। नियम के मुताबिक काम का समय: आमतौर पर रेत खनन का काम सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे (दिन के उजाले में) ही मान्य है।
